हिन्दी

हिन्दी भाषा की उत्पत्ति संस्कृत भाषासे हुई है ऐसा पाया गया है । हम सब हिन्दी कवितायें, गज़ल, साहित्य एवं फिल्मोके शोक़ीन तो है ही. किसी ना किसी रुपमें हिन्दी हमारे जीवन से जुड़ी हुई है ।

प्राचीनत्‌म भाषाओ में से एक है गुजराती भाषा । गुजराती मेरी मातृभाषा है, जो बिलकुल हिन्दी की तरह ही सुविकसित है । सुविकसित भाषा का अर्थ है की अपनी खुदकी लेखनशैली एवं साहित्य होना । उदाहरण के तोर पर, मराठी अल्पविकसित भाषा है, उसकी अपनी लेखनशैली नहि है. (एक टेक्सी ड्राईवर देसीहिसाब बगीतलाः "क्या यार? ईसमें मराठी हिन्दीमें क्युं लिखी है?" आईला! सोरी ...भाषा ही भी चांगली आहे भाऊ, सचीन तेंन्दुलकर आणी लता मंगेशकर आमचे राष्ट्रीय गौरव आहे । माला बरोबर येत? )  कुछ दक्षिणभारतीय प्रदेशोने अपने आपको हिन्दी से अलग कर रख़ा है. (रजनीकांत की बात नहि कर रहा हुं)

किसीभी देशकी पहेचान और उसके संस्कार भाषा ही है. राष्ट्रभाषा का स्थान सदैव स्थानिक, प्रादेशिक भाषासे उपर होता है। हिन्दी मेरी राजभाषा है और मुझे हंमेशा गर्व होता है जब टीवी पर किसी विदेशी को "नमस्ते" कहेते सुनता हुं! जब किसी भारतीय को दुनिया के सामने बोलने का अवसर मिलता है तब वो हिन्दी बड़े अभिमान से बोलता है । वो यह नहि सोचता की खुद पंजाबी है या मद्रासी । क्युं की हिन्दी अपनी पहेचान है । यही सच है ।

गांधीजी, नहेरुजी ,टागोरजी की चहेती; लता, सचीन, बच्चन की प्रिय, और मेरी राजभाषा हिन्दी की जय हो!